Beyond of understanding…

Left all her lovely words

Because those all are closed in a old room

Her diary is tearing a sad song with slow voice

Everybody asks what is behind the locked door

A girl named eclipse has escaped with her aloe or may be make her grave herself with her penumbra

Because she has known-in this worst garden,she could not reap her Almond blossom as hope

So she is living inside or outside to climb up with a rope

May be she could touch her rainbow of her imagination

Her door would be close as she saw the love’s situation

Rosemary bushes towards the closed door by growing up and surrounding it with laughing on unbounded relation

May be aster in aloe and abtilon are bowed in meditation.

All are in bowed in sajdas and holy Ramjaan may bring her holy soul at destination.

Written by Aruna Sharma.29.04.2020

11.00PM

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HAPPY RAMADAAN(RAMZAAN)🌷🌷to my all dear Bloggers, followers and friends.

मै-मैं का म़र्ज……

कहें जाके किस से अपना म़र्ज़ इस तक़रार -ए-मैं ही मैं का,

इक ऩासूर सा टीसता है घाव बन द़िल का।

क़ाश कि कोई द़वा करे या दुआ

आसम़ान में ढूंढ़ती है निग़ाह इक निशाँ च़ारागर का।

काश़ कोई दे दे मरह़म मेरे जख़्म-ए-प्यार के च़िनार का।

इस म़र्ज ने ना जाने ब़रबाद किये कितने दरीच़ा-ए-ग़ुलनार का।

अरे मत करो ब़र्बाद अपना व़क्त,रख ले सारा ख़जाना तू सारा मैं का।

समय बहुत ख़राब है ,साहिब,और क्या कहें रव़ायत-ए-जहाँ का।

इंसानों की बस्ती में ज़ानवर भी रहते हैं-मिस़ाल लो जरा बकरे का।

सारा दिन मैं मैं करता है घर बाहर होके म़गरूर अपनी शख़्सियत का।

बकरे की अम़्मा कब तक ख़ैर मनायेगी,कब तक जतन करेगी उसे बचाने का।

हल़ाक होने पे उसकी चमड़ी जब ढ़ोल पे मढ़ेगी,तब बजाते व़क्त तू ही तू की आव़ाज निकलेगी बाक़ायदा।

फिर मैं मैं ना रहेगा फ़ना होने के बाद कि हर कोई मुन्तजिर ही हैं उसी मंजिल की राह का।

खड़े हैं सब जिन्दगी के म़ुसाफिरखाने में इक क़तार में जैसे ऩमाज की अज़ान सुन खड़ा हो कोई शख़्स व़ुजू के लिये ज़ाहिद सा।

यक ब़ा यक रेलगाड़ी की सीटी सुन नव़ाबी अंदाज में बैठे हैं चाहे मेहमाँ हो चँद घड़ी का।

अगले मुक़ाम पे ही आयेगी अक़्ल कि जमीं पे ना था कोई फ़र्क नव़ाब और फ़कीर सा।

म़ेहमानव़ाजी-ए -नूरू-ए -ख़ुदा का हक़दार होगा मोम़िन या मैम़ूना बन आसमाँ के सरमाये सा।

Written by Aruna Sharma.28.04.2020

10.40PM.

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क़लम, दव़ात और ग़ुलाब……

आज दिल ने कहा – कुछ तब्दीलियों की चाहत है ,

अपनी जमीं और अपनी जुबाँ से मिले ग़र राहत है।

इक वीराने में कैक्टस के झुरमुटों के बीच खिला रहा मेरे दिल का गुलाब खिलाया है खिला ही रहे।

माना कि कैक्टस हैं काँटों से भरे,मेरे गुल़ाब भी है त़ेगदार अपनी हिफ़ाजत के लिये वो तने रहें।

क़िस्मत में दुश़्मन थे,हैं,और रहेंगे,स़िर मेरा तना था तना ही रहे।

नहीं झुकना है मुझे मेरे ग़ुनहगार के आगे,उसे आग लगती है तो लगी रहे।

मैने क़लम ब़गावत की स्याही में डुबो रखी हैं,कि क़ातिल का सिर क़लम हो तो ये स़िलसिला जारी रहे।

हाँ, आज मैं अपने पर हुये हर ज़ुल्म का हिसाब माँग रही हूँ बह़ीख़ाता-ए-म़ाजी में इक श़ै उभरती है उभरती रहे।

मेरी स्याही,क़लम मेरे गुल़ों की ख़ातिर है,कैक्टसों की बर्बादी होती है तो होती रहे।

कि घरों में गुलिस्ताँ होते हैं,काँटे बोने वाले के हिस्से ब़र्बादी के किस्से स़रेआम बयाँ होते हैं होते रहें।

या ख़ुदा मेरी आह़ का अस़र हो,ज़ालिम यूँ मर मर के जिये कि म़ौत को ना आये रहम़,यूँ मर मर के जीता रहे।

हाँ आज मैं अपनी आहों का अस़र देखूंगी कि ज़िगर से खून रिसता है रिसता रहे।

मेरी क़लम मेरे द़िल की आव़ाज है दुखती रग़ लिये कि कान किसी का ब़हरा हो होता रहे।

मेरी स्याही के आह़ों के समन्दर में मेरे क़ातिल की क़श्ती डूबती है तो डूबती रहे।

मेरे ख़ुदा!!आज आर पार की लड़ाई में होगा तम़ाशा दुनिया देखती है तो देखती रहे।

मेरा तुझे साथ देना होगा,आज आजमाना है तुझे,जितना भी तेरे ज़लवों में असर होता है होता रहे।

बेद़म हो गिरें मेरे दुश़्मन,कि मेरी इब़ादत सादगी सी ,कौन जीता है या मरता है, देखना है अस़र होता है होता रहे।

तेरी जन्नत को दोज़ख बनाने वाले ख़ुद दोज़ख की आग में जल मरें,मेरी त़ीर-ए-नज़र का यूँ ही असर होता है ,होता रहे।

Written by Aruna Sharma.28.04.2020

10.35PM

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