कभी खुद को देखा है….

खुद से भी प्यार कर ,मेरी जान,

जीने का सलीका आ जायेगा।

बेकरार सा द़िल तेरा है,

कुछ और न हो पर इसे क़रार आ जायेगा।

ये किस डगर पे चल पड़ी,

तन्हा तन्हा,ए हम़नशीं!!दौर-ए-तूफ़ानों से ना खेल,

ना जाने कहाँ कूचा-ए-दय़ार आ जायेगा।

इस जहाँ में सब मुब्तिला हैं,

रुक कि यहीं ब़ाग-ए-ब़हार आ जायेगा।

कोई रुस्वाई नहीं कहीं,फ़कत प्यार है,

वो प्यार का क़ाफिला यहीं आ जायेगा।

बस एक बार आईना देख और ज़ुल्फें सँवार,

ता-उम्र ज़िन्दगी में सावन का निखार आ जायेगा।

Writen by aruna sharma.

26.01.2019. 1.40pm

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