A City Named Dew….

Here all things are in D shape

The pond is in D shape

Can my heart swim there and all things to face

All palm trees are bowed in D shape

All paths are walking with calm mood in D shape

Are they waiting for coming essere tutto pepe

I feel this city is a reflection of promise of dawn’s dew

All branches are bowed in honour of him to shower some dew

Oh.i went which place he does not like me

Sorry all palm trees for daring to enter your woods by me

That city is unique and lonely

Only one person can live there as lonely

His little hut is a temple to worship of Goddess of love only

And that pond should be pure and holy

All those areas are prohibited,may be coming person is his amour

I am fully satisfied to see him at his own corner to see sunset become happy than before.

Written by Aruna Sharma.19.10.2021;1.14 am.

🌹🌴🌹🌴🌹bless you with love,me amour!!

Who is aruna?a soul of mi amour.

May God bless you,my D🌹🌴🌴🌴🌹

एक ख़ामोश गुनाह….

दरोगा को आना पड़ा दंगा फ़साद की खबर सुनकर,

हैरान था कि वहाँ कोई दंगा ही न था,

हाँ दीवारो ज़मी पे कतरा -ए -खून के निशाँ थे।

लाश की तलाश में उसने अपने कारिंदों को दौड़ाया,

कुछ समय बाद वे एक जख़्म खाये दिल को उठा लाये,

उस दिल के साथ एक अफ़सुर्दा सी मलिका थी।

मुआईने के बाद कड़क कर दरोगा ने पूछा-

मोहतरिमा,ये ख़ू के दाग़ कहाँ से आये?

खामोश जुबाँ खुली और दरोगा सन्न रह गया।

वो मायूस से लब बोल पड़े-“ऐ हाकिम !!

तू जा और शहर का बन्दोबस्त कर कि कोई बिना वजह दंगे फ़साद का इनाम ना बने।

यहाँ सिर्फ जज़्बातों का मामला है,तू क्या इसका इन्जाम करे।

मेरा म़हबूब मेरे अरमानों का खून कर परदेश गया।

मेरा दिल खामोशी से खून के आँसू बहाकर अब दरवेश हो गया।

अब ख़ुदा के दरबार में इल्तिजा करूंगी-या ख़ुदा ,मेरे महबूब को सजा मत देना,

क्योंकि मैं भी कुसूरवार थी जो उससे म़ुहब्बत की।

वो जहाँ भी रहे खुश रहे,यही सदा अब भी मेरे दिल से निकलती है।

मेरी दुआ उसे लग जाये ,कुछ ऐसा इन्तजाम कर दे।

मैने अपने जख़्मों को सी लिया है,अब मेरी मुहब्ब़त को इब़ादत की राह पे ला दे।

मुहब्ब़त की राह में कोई कुसूरवार नहीं होता,

‘गर होता तो मैं ही कुसूरवार थी ,फ़कत मैं ही कुसूरवार थी।

एहसान है मेरे म़हबूब का कि एक लौ इबादत की बन गई मेरी मुहब्ब़त।

मुहब्ब़त में फ़कत खोना होता है पाना नहीं,उसे खोकर पाली है तेरी मैंने इज्जत।

अब मैं दरवेश बन तुझे ही पाऊंगी ,मेरे ख़ुदा !!

मेरा ज़ज्बा-ए-बयाँ तेरी तहरीर बन कभी ना होगा ज़ुदा।

अब तू ही मेर मालिक,ख़ालिद औ’ हाफ़िज है,

अब दुनिया की राह को कहा ख़ुदा हाफ़िज है।

Written by Aruna Sharma.18.10.2021;4.28pm