Come on deardew!!

Rahega ishq tera kaak mein milake mujhe
Hue hain ibteda mein ranj inteha ke mujhe
YOUR LOVE WILL GRIND ME TO DUST
I HAVE SEEN THE EXTREMES OF THE LOVE
Aa, aa bhi ja
raat dhalne lagi, ho, chaand chhupane chala
ho aa, aa bhi ja
OH ,COME OVER
THE NIGHT IS PASSING AWAY
THE MOON IS GOING DOWN

teri yaad mein bekabar,
shama ki tarah raat bhar-2
jali aarzu dil jalaa, aa, aa bhi ja
INDIFFERENT TO THE WORLD IN YOUR MEMORY
LIKE THE FLAME WHOLE NIGHT
IN DESIRE FOR YOU THIAS HEART BURNED
OH ,COME OVER

ufak par khadi hai sahar, andhera hai dil mein idhar -2
wahi roz ka silsilaa, aa, aa bhi ja…
raat dhalne lagi, chaand chhupane chala
ho aa, aa bhi ja…
A NEW DAWN IS WAITING
THE DARKNESS IS HERE IN MY HEART
ITS THE SAME THING EVERY DAY
OH, COME OVER

Orlando means Other land….

What is the main difference between your old city and Orlando.?

Your home is your own home having wonderful memories.

Those are not enough to live respectfully,

That is other land means the strange land like los zancudos nos picaban de lo lindo

Right,you have to be love there’s zanducos like your Amour

And we say-canta lindo tu mujer

,wondeful,my friendstar!!

Written by aruna sharma.😉😉😉😉😉

15.04.2019. 1.06 at midnight.

All images are taken from Google.

All copyrights are reserved by aruna sharma.

अगर मैं कहूँ,तू ना समझे तो क्या करुँ…

द़िल कहे,नज़रों से झलके बन के फ़साना प्यार का,

तू ही ना समझे अल्फ़ाज इशारों के तो बता मैं क्या करुँ?

इतना इन्तजार तो त़कदीर भी नहीं कर सकी,कितना तेरा एतब़ार करुँ?

जिन्दगी के हर हाशिये पे नज़र आया तू,तेरे इन नज़रानों का क्या करुँ?

अब तो सजा दिया है नज़्मों के स़फों पे सूखे गुलाब़ की तरह,

तेरी यादों को तेरे वादों की तरह भूलके अब मोर का पँख बना लिया है।

हाँ शिकवा ना करना कि तेरी शख्स़ियत को अपने मँदिर की बंसी की धुन बना लिया है।

अब मुझे तू तो क्या कोई ना पा सकेगा,खुद को मैंने राधा बना लिया है।

ना दुनिया से मतलब ना दुनियादारी से,सबको मानस का हँस बना दिया है।

बहुत ठोकरें खायी हैं जिन्दगी ने, वक्त के हाथ खिलौना बन कर नचा दिया है।

अब नाचूँगी सिर्फ बाँसुरी की धुन पे जो गूँज रही थी बरसों से मन में याद आ गया है।

वो मेरा कान्हा था द़िल के एक कोने में छिपा, हर धड़कन मेरी राधा थी अब य़कीनआ गया है।

अब सोती हूँ अपने कान्हा के श़ाने पे सिर रखे उसकी मुरली की धुन में सारा जहाँ पा लिया है।

अब सब म़ुरीद हैं जिस च़ैन की तल़ब में हाँ मैंने जीते जी उस चैन का सामान पा लिया है।

ये जहाँ अब और ख़ूबसूरत लगता है,वो जहाँ भी अपना लगता है,ये राज़ पा लिया है।

हाँ शुक्रगुज़ार हूँ दुऩिया की कि हर उसकी शैय ने मेरा स़ाया मेरा कान्हा मिला दिया है।

बहुत खुश हूँ पर डरती भी हूँ कि ये मेरी खुशफ़हमी तो नहीं।

कहाँ राधा कहाँ मैं ,क्या ये मेरी तकदीर की गलतफ़हमी तो नहीं।

पर वो कौन है जो हरदम साये की तरह मेरी तन्हाइयों में शामिल है।

आए कोई स़ूफी तो बताये कि मेरी त़कदीर का साहिल कौन है।

Written by aruna sharma.14.2019

11.20 pm

(All copyright is reserved by aruna sharma.images are taken from Google)