ख़ुदा म़ेहरबान…..

सूरज की गर्मी से रेतीले धोरे जब जलने लगे,

रात दिन जब आग से दहकने लगे,

गले भी इक बूंद को तरसने लगे,

पानी के दरस को जब सारे पनघट रोने लगे,

तब ख़ुदा ने गर्मी के मौसम पर ऩालिश करवा दी,

औ’ जमीन की सूखी तड़कती देह पे बारिश की मालिश करवा दी।

देखा,क़ायनात पर किसी एक का हक नहीं,यारों!!

गर्मी के साथ के धूल भरे गरम भ़भके चलते हैं,

तो बादल भी समन्दर से पानी ही भरते हैं,

आसमान का ऊसूल-कभी धूप कभी बादल साथ चलते हैं।

ज्यों धूप संग छाया भी चलती है,

फूल झड़ते है तो खिलते भी हैं,

मेरा ख़ुदा बड़ा रहमदिल है,

अपने अपने दर्द की अर्जी लगा दो उसके दरब़ार में,

फिर खो जाओ अपने जहाँ मे होके बेफ़िक्र ,यारों।

Written by Aruna sharma,21.07.2021;11:49PM

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